
श्री.सुभोध मिश्रा
भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़, कृषि क्षेत्र, हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण बदलावों के दौर से गुज़र रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस क्षेत्र में सुधार और आधुनिकीकरण के लिए कई नीतियों और योजनाओं को लागू किया है, जिनका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभदायक बनाना है।
प्रमुख बदलाव और पहल
मोदी सरकार के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों को कई प्रमुख श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
तकनीकी और डिजिटल क्रांति💻 डिजिटल कृषि मिशन: सरकार डिजिटल कृषि मिशन के माध्यम से कृषि को तकनीकी रूप से उन्नत कर रही है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिग डेटा और जियो-स्पेशल डेटा जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है ताकि फसल की निगरानी, मिट्टी प्रबंधन और मौसम के पूर्वानुमान में सुधार हो सके। ड्रोन प्रौद्योगिकी: “ड्रोन दीदी” योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन ड्रोनों का उपयोग उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव, फसल स्वास्थ्य की निगरानी और भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लिए किया जा रहा है। ई-नाम (e-NAM): यह एक ऑनलाइन ट्रेडिंग पोर्टल है जो किसानों को देश भर की मंडियों से जोड़ता है। इसका उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करना और किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद करना है। अब तक 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में 1410 मंडियां इस नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं।
वित्तीय सहायता और सुरक्षा 💰 प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN):
इस योजना के तहत, 11 करोड़ से अधिक किसानों को प्रति वर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाती है। यह राशि तीन किस्तों में दी जाती है और इसका उद्देश्य किसानों की छोटी-मोटी ज़रूरतों को पूरा करना है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY):
यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा या ओलावृष्टि से होने वाले फसल नुकसान के लिए बीमा कवर प्रदान करती है। इस योजना ने किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है और उन्हें जोखिमों से बचाया है।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): इस योजना के तहत किसानों को कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। 2025-26 के लिए केसीसी के तहत ऋण सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख की गई है, जिससे किसानों को खेती के लिए आसानी से पैसा मिल सके।
प्राकृतिक खेती और सतत विकास 🌱 राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF): यह मिशन रासायनिक मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देता है। सरकार का लक्ष्य 2025 तक प्राकृतिक खेती के तहत क्षेत्र को 50% तक बढ़ाना है। 2023-24 में प्राकृतिक खेती से कुल खाद्यान्न उत्पादन का 5.29% प्राप्त हुआ। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना: इस योजना के माध्यम से किसानों को उनकी मिट्टी के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जानकारी दी जाती है, जिससे वे सही मात्रा में उर्वरकों का उपयोग कर सकें और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रख सकें।
डेटा और आंकड़े 📊
कृषि विकास दर:
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में भारतीय कृषि क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर 4.18% रही है।
खाद्यान्न उत्पादन:
भारत खाद्यान्न, दूध, दाल और मसालों का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। देश ने खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है।
कृषि बजट में वृद्धि:
2014-25 के बीच कृषि बजट में 5 गुना की वृद्धि हुई है, जो 2007-14 के ₹1.37 लाख करोड़ से बढ़कर ₹7.27 लाख करोड़ हो गया है।
ये बदलाव भारतीय कृषि को एक पारंपरिक, निर्वाह-आधारित क्षेत्र से एक आधुनिक, व्यावसायिक और टिकाऊ क्षेत्र में बदल रहे हैं। सरकार की इन नीतियों ने किसानों को सशक्त किया है और भारतीय कृषि को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया है।
