मोदी विजन : भारत के सतत विकास में श्वेत क्रांति 2.0 का आगाज़ !

ग्रामीण भारत के विकास में सहकारी समितियों का महत्वपूर्ण योगदान

डॉक्टर आर. एस. सोढ़ी

अध्यक्ष, भारतीय दुग्ध महासंघ एवं पूर्व महासंचालक – अमूल दूध

श्वेत क्रांति के माध्यम से भारत में दूध उत्पादन में 70 के दशक से ही उन्नति होने लगी जिसमें गुजरात स्थित आणंद के ग्रामीण परिवेश और विशेषकर महिलाओं ने बहुत योगदान दिया। जमीनी स्तर से आने वाले एवं आम जन से सीधा संपर्क रख उनकी दिक्कतों को समझते हुए प्रधानमंत्री श्री.नरेंद्र मोदी ने इस क्षेत्र के साथ ही मजदूर, छोटे व्यापारी और किसान और दुकानदारों के लिए एक मजबूत सर्व समावेशी योजना पर काम कर सभी को सहकारिता से जोड़ना शुरू किया। सहकारी संस्थाओं को स्वायत्त अधिकार देने के साथ ही उनका विस्तार, रोजगार सर्जन और महिला सशक्तिकरण के लिए डेयरी किसानों को अधिक संगठित कर डेयरी सहकारी समितियों के क्षेत्रों की पहुँच बढ़ाई गई। इसमें राष्ट्रिय डेयरी विकास ने श्वेत क्रांति 2.0 में महत्वपूर्ण समन्वय बनाया है।

मोदी विजन से शुरू हुई श्वेत क्रांति 2.0 जिसमें पिछले ग्यारह वर्षों में देश के आठ करोड़ पशुपालकों की आय में पांच गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी हुई है और हम दूध उत्पादन में दुनिया के सिरमौर बने हुए हैं।  इसके लिए प्रधानमंत्री श्री.मोदी ने वर्ष 2021 में स्वतंत्र सहकारिता विभाग का गठन कर दूसरी श्वेत क्रांति को मजबूत, संगठित दुग्धविपणन, पशुचिकित्सा और चारा आपूर्ति के लिए, डेयरी किसानों की सहायता के लिए सहकारी समितियों का गठन किया। इसीके माध्यम से मूल्यों में अस्थिरता का समाधान भी होने लगा।

आज इसी के परिणामस्वरुप सहकारिता के माध्यम से दूध, दुग्ध जन्य पदार्थ का एक व्यवस्थित बाजार स्थापित हो गया है। 50 वर्ष पहले जहां प्रति व्यक्ति दूध उत्पादन 110 ग्राम था वह 2014 में 300 ग्राम और वर्तमान में 460 ग्राम तक जा पहुंचा है। जिसे बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए आने वाले समय में 850 ग्राम तक ले जाने की तैयारी है, जो मोदी विजन के सहकारिता नीति से संभव होगा।

इसी सहकारी विपणन प्रणाली से दूध उत्पादन को उद्योग का दर्जा मिल रहा है, विशेषकर युवा वर्ग भी इस और आकर्षित हो रहा है। संकर नस्ल के पशु पालन के और उनके जन्म के लिए आधुनिक तकनीक के नवाचार पर हमारे कृषि वैज्ञानिक काम कर रहे हैं।

हम श्री.मोदी के प्रधानमंत्री के ग्यारह सालों का आंकलन करें तो जिस तरह से हर क्षेत्र में सर्व समावेशक विकास का दृष्टिकोण रखकर मोदी विजन स्थापित किया है वह प्रधानमंत्री की जन हित से जुड़ी उनकी जमीनी सोच को दर्शाती है।आर्थिक क्षेत्रों में आज देश दुनिया के सबसे प्रमुख देशों में आ खड़ा हुआ है। अगर हम केवल दुग्ध उत्पादन पर ही देखें तो ग्यारह साल पहले दुनिया के दूध उत्पादन में हमारा योगदान 16% ही होता था जो 50% से बढ़कर अब 20% हो गया है।

आज इसी जागरूकता का परिणाम है कि, जिस भारत वर्ष के विषय में दशकों पहले यह कहा जाता था कि, वहां तो दूध घी की नदियां बहती थीं”, आज हम उसी दिशा की और अग्रसर हो रहे हैं। यह पौष्टिक पेय शुरू से ही सभी की पसंद रहा है। पहले यह प्रति व्यक्ति तकरीबन 110 ग्राम उपयोग में लिया जाता था जो अब बढ़ कर 460 ग्राम से अधिक पर पहुंच गया है। इसके साथ ही दुग्धजन्य अन्य पदार्थ जैसे दही, छाछ, घी, चीज, मक्खन और पनीर का उपयोग भी बढ़ गया है। पनीर तो कोविड के समय में अपने गुणों की वजह से पसंद किया जाने लगा और लोग पशु पालन की ओर आकर्षित होने लगे। लोकल फॉर वोकल’ की मोदी संकल्पना को एक नई उड़ान देते हुए दुग्ध उत्पादकों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज मोदी विजन की विकासोन्मुख नीतियों से ही श्वेत क्रांति 2.0 के द्वारा एक नया व्यवसायिक माड्यूल स्थापित हो रहा है। जिसमें अनुमान है कि, आने वाले समय में लगभग 2 लाख के करीब नई सहकारी संस्थाएं बनेंगी। जिससे बाजार में तेजी आएगी और अच्छे मूल्यों के साथ प्रगति के नए रास्ते भी निर्मित होंगे। जीएसटी कम करने से लगभग 11 हजार 4 सौ करोड़ का फायदा होने से दुग्ध क्षेत्र के साथ ही असंगठित किसान, व्यापारी और पशुपालक संगठित होंगे। पूरी दुनिया को सबसे ज्यादा दूध निर्यात एशिया महाद्वीप से ही होता है और उसमें हम सबसे आगे हैं। अपने दूरदर्शी निर्णयों के साथ ही प्रधानमंत्री श्री.मोदी आर्थिक और स्वस्थ्य पशुपालन और पशु खाद्य के साथ भू-उपचार में नवाचार लाने को समर्पित हैं।

केंद्र में सहकारिता मंत्रालय स्थापित करना यह मोदी विजन का सबसे महत्वपूर्ण और दूरदर्शी वाला निर्णय रहा। जिससे देश में एक नई दुग्ध क्रांति का आगाज़ हुआ है। सहकारिता के सबसे अनूठे और व्यवस्थित क्रियान्वयन से ही यह सर्व समावेशक योजना श्री.मोदी के कुशल नेतृत्व में संभव हो पाई है।

प्रधानमंत्री मोदी के इस निर्णय से किसानों, पशु पालकों और रोज मर्रा के काम करने वालों के दैनिक जीवन के स्तर, शिक्षा और आचार-विचार पर भी प्रभाव पड़ेगा। जिससे विशेष कर शिक्षा के क्षेत्र में विकास से प्रधानमंत्री की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ की अवधारणा को एक नया मुकाम हासिल होगा। प्रधानमंत्री श्री.मोदी ने डेयरी योजनाओं के लिए हर साल बजट 20 से 30% बढ़ा कर हमारे स्थानीय ब्रांड्स को विश्व पटल पर स्थापित करने को वे कटिबद्ध हैं।

डेयरी क्षेत्र में विदेशी कंपनियों को प्रवेश नहीं देकर और जीएसटी में कटौती कर प्रधानमंत्री ने देश के पशुपालकों की मेहनत और लगन पर पूरा विश्वास जताते हुए दिखाया कि, भारत किसी भी तरह के टैरिफ या बंधनों से तो डरने वाला है ही घबराने वाला है। भारत में दूध उत्पादन जीविका का जरिया है, इसलिए बाहर के डेयरी उद्योगों को भारत में नहीं आने दिया गया। जो अनुदान और शासकीय सुविधाएं इन विदेशी डेयरियों को दी जाती अब उनका उपयोग देश के ही दुग्ध उत्पादन विकास के लिए उपयोग में किया जाएगा।

तुलनात्मक रूप में अगर हम 1990 की बात करें तो तब हम तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर थे। फिर विदेशी निर्यातकों को छूट देकर हम आज खुद ही तेल आयात करने लगे। इसकी तुलना में प्रधानमंत्री मोदी ने डेयरी क्षेत्र में विदेशी व्यापारियों को निर्यात पर प्रतिबंधित किया है, जिससे भारत में अब एक नई श्वेत क्रांति जन्म लेने जा रही है और जिसका श्रेय प्रधानमंत्री श्री.नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टी के साथ ही अनुशासित निर्णय क्षमता को जाता है।

17 सितंबर, प्रधानमंत्री श्री.नरेंद्र मोदी के 75 वें जन्मदिवस के उपलक्ष में मोदी विजन की प्रगति पर उपरोक्त मेरे विचार साझा करते हुए उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ।

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लेखक परिचय :

डॉक्टर श्री. आर. एस. सोढ़ी ने अमूल दूध में सेल्स अधिकारी से अपना सफर शुरू किया और फिर महासंचालक के पद से सेवा निवृत हुए। श्री.सोढ़ी के कार्यकाल में अमूल दूध ने नई ऊंचाइयों को छुआ। वर्तमान में वे भारतीय दुग्ध महासंघ के अध्यक्ष हैं।

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